बानू मुश्ताक ने मैसूरु दशहरा उत्सव का किया उद्घाटन, नाद देवता की पूजा की - MYSURU DASARA 2025
कुछ वर्गों की आपत्तियों के बीच, अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक ने सोमवार को मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन किया.
मैसूर: प्रसिद्ध मैसूरु दशहरा उत्सव सोमवार 22 सितंबर से धार्मिक और पारंपरिक उत्साह के साथ शुरू हुआ. अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक ने आज मैसूर के चामुंडी हिल्स में प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन किया. उद्घाटन समारोह में मुश्ताक के साथ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, राज्य मंत्रिमंडल के कई मंत्री तथा अन्य लोग मौजूद थे.
बानू मुश्ताक ने यहां चामुंडी पहाड़ियों के ऊपर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर के परिसर में देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति पर पुष्प वर्षा कर शुभ "वृश्चिक लग्न" के दौरान उत्सव का उद्घाटन किया. इससे पहले, मुश्ताक ने मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ चामुंडेश्वरी मंदिर का दौरा किया और उद्घाटन से पहले देवी, जिन्हें "नाद देवता" (राज्य देवता) कहा जाता है, की पूजा की.
दशहरा उत्सव का उद्घाटन करतीं बानू मुश्ताक व अन्य.नाडा हब्बा' (राज्य उत्सव) के रूप में मनाया जाने वाला 11 दिवसीय दशहरा या 'शरण नवरात्रि' उत्सव इस वर्ष भव्य होने की उम्मीद है, जिसमें कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के साथ-साथ शाही ठाठ-बाट और गौरव की यादें भी दिखाई देंगी. नवरात्रि के इन शुभ दिनों के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
मैसूर के महल, प्रमुख सड़कों, मोड़ों या सर्किलों और इमारतों को रोशनी से जगमगा कर सुशोभित किया जाएगा, इस प्रथा को "दीपलंकारा" के नाम से जाना जाता है. भोजन मेला, पुष्प प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, किसान दशहरा, महिला दशहरा, युवा दशहरा, बाल दशहरा और कविता पाठ जैसे दर्जनों कार्यक्रम लोगों को आकर्षित करते हैं. प्रसिद्ध दशहरा जुलूस (जंबू सवारी), एयर शो, मशाल जुलूस और मैसूर दशहरा प्रदर्शनी भी बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करती है.
बानू मुश्ताक के नाम पर क्या था विवादः मुश्ताक को दिए गए निमंत्रण पर भाजपा नेताओं सहित कुछ वर्गों ने आपत्ति जताई थी. मामला कोर्ट तक पहुंचा. कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार के निमंत्रण को बरकरार रखने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा.
बानू मुश्ताक कौन हैंः
बानू मुश्ताक कन्नड़ लेखिका हैं. उम्र करीब 62 वर्ष है. किसान एवं कन्नड़ भाषा आंदोलन की पूर्व सदस्य रही हैं. मई 2025 में वह अपने लघु कहानी संग्रह एडेया हनाटे के लिए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली पहली कन्नड़ लेखिका बनीं. दीपा भस्थ ने इस कहानी संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद किया था.


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